“किर्चें”

आज एक पुराना रिश्ता दिखा
काफी जर्जर हो चुका था
उस की दीवारों से पुरानी यादों की पपड़ियाँ भुर-भुर कर गिर रहीं थीं
मैं ने सोचा इतना कमज़ोर तो ना हुआ करता था ये
ऐसी हालत कैसे हो गई
काफी देर टटोला जाँचा-परखा तो देखा
नींव कमज़ोर रह गई थी कमबख़्त
भरोसे का सी
मेंट काफ़ी कम डला था

— Surendra Bhatia "Salil"

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