हज़ारों बार मौजें चूर कर जाती हैं घर मेराख़ता इतनी फ़क़त साहिल पे डेरा डाल बैठा हूँसदा-ए-रूह ने मुझ को ही ठहराया 'सलिल' दोषीहो बे-ख़ुद आज उस से पूछ अपना हाल बैठा हूँ— Surendra Bhatia "Salil"