चोट कोई तो है यूँँ ही तो दर्द नहींये रुख़्सार तिरा यूँ ही तो ज़र्द नहींकुछ उलझन है तो अर्ज़ी दे ज़ाहिर तो करफिर न बताना रब तेरा हमदर्द नहीं— Sanjay Bhat