badhaai aise gulistaan ki khushi hamne | बढ़ाई ऐसे गुलिस्तान की ख़ुशी हमने

  - Shajar Abbas

बढ़ाई ऐसे गुलिस्तान की ख़ुशी हमने
तब्बसुम-ए-लब-ए-गुल पे ग़ज़ल लिखी हमने

फ़लक के 'चाँद' 'सितारों' को और 'सूरज' को
सुन अपने चेहरे से बाटी है रौशनी हमने

क़लम को चूम लिया और ख़ुदा का शुक्र किया
जब उनके दहन से अपनी ग़ज़ल सुनी हमने

ग़म-ए-फ़िराक़ में ता-उम्र अश्क़ बार रहे
तुम्हारे बाद मनाई नहीं ख़ुशी हमने

निगाह-ए-ख़ार में हम ख़ार बनके चुभने लगे
गुल-ए-चमन पा लिखी जब से शायरी हमनें

तमाम 'उम्र शजर दिल ही दिल में रोते रहे
पर अपने होंठों पे रखी सदा हँसी हमने

  - Shajar Abbas

Eid Shayari

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