chalo mataa-e-jaan ik doosre ki chaah karen | चलो मता-ए-जाँ इक दूसरे की चाह करें

  - Shajar Abbas

चलो मता-ए-जाँ इक दूसरे की चाह करें
है गर गुनाह ये तो आओ फिर गुनाह करें

फ़ुलाँ फ़ुलाँ को फ़ुलाँ को चलो गवाह करें
बहुत दिन 'इश्क़ हुआ आओ अब निकाह करें

दिलों से ख़ौफ़-ए-ज़माना निकाल कर अपने
सनम हम आज मुहब्बत का इफ़्तिताह करें

मिलेगा हिज्र का तोहफ़ा मिलेगी रुसवाई
तो हम बताओ मुहब्बत ये ख़्वा-मख़्वाह करें

'शजर' ग़ज़ल वो सुनाओ तुम आज महफ़िल में
जिसे ये लोग सुने और वाह-वाह करें

  - Shajar Abbas

Mehfil Shayari

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