मेरे माबूद कुछ तेरे मुसलमाँसफों में दिन-ब-दिन जो बढ़ रहे हैंग़रीब-ओ-मुफ़्लिसों का हक़ दबा करनमाज़-ए-बा-जमाअत पढ़ रहे हैं— Shajar Abbas