ऐ इश्क़ तेरे जाल में उलझा हुआ हूँ मैं
अब तक किसी की याद में डूबा हुआ हूँ मैं
इस बात पर तू हाथ मिला अब तिरी तरह
ग़म का लिबास ओढ़ के बैठा हुआ हूँ मैं
तन्हाइयों की बात अगर उठ रही तो सुन
अब के बरस तो और भी तन्हा हुआ हूँ मैं
कैसे तिरी नज़र है किसी गैर की तरफ़
पहलू में तेरे जबकि यूँ बिखरा हुआ हूँ मैं
इक ओर दोस्त मुझ में कोई भी हुनर नहीं
इक ओर दोस्त इश्क़ का मारा हुआ हूँ मैं
— Shekhar Mandal















