जी नहीं लगता हमारा क्या करें तुम बिन हम
यार कैसे हो गुज़ारा क्या करें तुम बिन हम
लाख आई हो बहारें साथ ख़ुशियाँ ले कर
ख़ूब-सूरत है नज़ारा क्या करें तुम बिन हम
वो तुम्हारे बिन सुई भी तो नहीं मिलती थी
तुम थे इस हद तक सहारा क्या करें तुम बिन हम
रूठ के हम से कहाँ गुम हो गए जान-ए-जाँ
तुम ही थे आँखों का तारा क्या करें तुम बिन हम
एक मुद्दत से तुम्हें ही याद करते करते
सो गया दिल भी बिचारा क्या करें तुम बिन हम
— Shekhar Mandal















