"एक तुम सेे ही हम ने मुहब्बत करी"
एक तुम से ही हम ने मुहब्बत करी
तोड़ दो दिल शिकायत करेगा नहीं
भर गईं हैं ये आँखें बस ये सोच कर
तुम बिना ये जो दिल है भरेगा नहीं
एक तुम से ही हम ने मुहब्बत करी
तुम समुंदर की हो तो उसी में रहो
हो जहाँ पर भी तुम बस ख़ुशी से रहो
सुब्ह शाम में इक दोपहर की तरह
आती जाती रहो बस लहर की तरह
तो किनारा भी प्यासा मरेगा नहीं
एक तुम से ही हम ने मुहब्बत करी
तोड़ दो दिल शिकायत करेगा नहीं
— Shobhit Dixit















