“सीढ़ी “
ज़ीस्त के सीने में
वक़्त के ज़ीने में
क़दम क़दम पे ढल रहा हूँ
क़दम क़दम पे सड़ रहा हूँ
यादों को याद करते करते
फिर उलटे पाँव चढ़ रहा हूँ
— khamakhaah
ज़ीस्त के सीने में
वक़्त के ज़ीने में
क़दम क़दम पे ढल रहा हूँ
क़दम क़दम पे सड़ रहा हूँ
यादों को याद करते करते
फिर उलटे पाँव चढ़ रहा हूँ
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