Gulshan
Gulshan
Nazm

"काश ये हो पाता"

काश ये हो पाता कि
हवा के झोंकों की तरह कभी तुम भी
शाम को दरवाज़े पर दस्तक दिया करते
गिले शिकवे को दूर करते
तो कभी कुछ शिकायत किया करते

काश ये हो पाता कि
कुछ बातें तुम बिना समझाए भी समझ जाया करते...
न हूँ मैं तब भी मेरे आने की उम्मीद लिए
मेरे लिए चाय बनाया करते

काश ये हो पाता कि
भीड़ में मेरे न होने पर तुम तन्हा महसूस किया करते...
मेरे बिना बात के रूठ जाने पर
कभी कभी मुझे मना भी लिया करते

काश ये हो पाता कि
आँखों की भाषा को तुम भी पढ़ लिया करते...
कभी शाम को ढलती धूप को देख कर
मुझे भी याद कर लिया करते

— Gulshan

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