इस दफ़ा प्यार है और बस
आख़िरी बार है और बस
इस जहाँ में सभी आसरा
इक मिरा यार है और बस
बालपन से बुढ़ापा मियाँ
साँस दो चार है और बस
रूप धन सब है उस पर इधर
वक़्त की मार है और बस
हाथ में कुछ किताबें ये ही
मेरा संसार है और बस
— Sarvesh Pandey
आख़िरी बार है और बस
इस जहाँ में सभी आसरा
इक मिरा यार है और बस
बालपन से बुढ़ापा मियाँ
साँस दो चार है और बस
रूप धन सब है उस पर इधर
वक़्त की मार है और बस
हाथ में कुछ किताबें ये ही
मेरा संसार है और बस
Other ghazal from the same pen
Shers of beautiful tasveer.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling