मैं इस यक़ीन से आया हूँ तेरे दर मौला
सुधार दे मेरी बिगड़ी हुई डगर मौला
ये अहल-ए-ज़ोर कहाँ से हमें डराएँगे
हमें पता है तिरी हम पे है नज़र मौला
हर एक शख़्स की जायज़ दुआ न रद हो कभी
तू डाल सब की दु'आओं में वो असर मौला
है इल्तिजा यही हम सब का इक ज़माने से
बना दे दिल को तू तक़्वा का एक घर मौला
वहाँ-वहाँ से गुज़र काश हो मदीने में
जहाँ-जहाँ से नबी का हुआ गुज़र मौला
— Waseem Siddharthnagari















