Waseem Siddharthnagari

Waseem Siddharthnagari

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Waseem Siddharthnagari shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Waseem Siddharthnagari's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
ज़रा सी मिल्कियत ले कर तकब्बुर में मगन क्यों हो
ठिकाना जब तुम्हें मालूम है दो गज़ ज़मीं होगी
Waseem Siddharthnagari
मेरे हिस्से की कोई रौशनी रखता कैसे
मैं तो सूरज की तरह तेज़ चमकता भी नहीं
Waseem Siddharthnagari
इस तरह से दिल मेरा अपने घर में लगता है
घर में रहता हूँ फिर भी घर की याद आती है
Waseem Siddharthnagari
इस शिद्दत से आग लगी है सीने में
केवल तेरी याद से बुझना मुश्किल है
Waseem Siddharthnagari
शब-ए-ज़ुल्मत भी हो जाए पशेमाँ
दिया ऐसा जलाना चाहता हूँ
Waseem Siddharthnagari
कौन किस पर किस तरह करता रहे यूँ एतिबार
क्यों कि चेहरों में छुपा हर शख़्स दिखता है मुझे
Waseem Siddharthnagari
दरीचा खोलकर क्या देखता हूँ
वही इक चाँद उसमें तेरा चेहरा
Waseem Siddharthnagari
बहुत यादें जुड़ी हैं इस जगह से
यहाँ मैं ख़ूब रोना चाहता हूँ
Waseem Siddharthnagari
मुझे भी ढकने हैं सब ऐब अपने
सो अब पैसे कमाना चाहता हूँ
Waseem Siddharthnagari
मुझ को लगता था मेरा हाथ नहीं छोड़ेगी
वक़्त कैसा भी हो वो साथ नहीं छोड़ेगी

मैं हूँ इस वक़्त यूँ तन्हाई का मारा शायर
दिन को गर बच भी गया रात नहीं छोड़ेगी
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Waseem Siddharthnagari
चेहरे से ख़ुश-मिज़ाज अदाकारी ख़ास है
वो शख़्स ग़म में मुब्तिला है यानी ख़ास है

वो जब तपाक से गले मुझको लगाएगी
मालूम होगा तब उसे वो कितनी ख़ास है
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Waseem Siddharthnagari
नुमाइश जिस्म की करते रहो तुम
नुमाइश हम हया करते रहेंगे
Waseem Siddharthnagari
ठिकाना गर कोई पूछेगा हमसे
कहेंगे फ़ख़्र से दो गज़ ज़मीं है
Waseem Siddharthnagari
अगर तौफीक़ सजदे की मयस्सर हो रही है फिर
ख़ुदा का शुक्र है मुझको अमीरी से नवाज़ा है
Waseem Siddharthnagari
मैं हक़ीक़त उसे समझ बैठा
जो हक़ीक़त में यार झूठा है
Waseem Siddharthnagari
मैं तो इज्ज़तदार समझा था उसे अपनी तरह
और बदकिरदार समझा वो मुझे अपनी तरह

दोनों का है अपना अपना फ़लसफ़ा-ए-ज़िन्दगी
जिसको जैसा जो लगा समझा उसे अपनी तरह
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Waseem Siddharthnagari
कोई ग़लती से अपनी सीख लेता है
कोई बस कोसता रहता है ग़लती को
Waseem Siddharthnagari
समझ जाओगे तुम भी हाल मेरा
किसी से दिल लगा कर देख लेना
Waseem Siddharthnagari
उसको आज़ादी से नफ़रत ख़ुद-ब-ख़ुद हो जाएगी
जो परिंदा पिंजरे में रहने का आदी हो गया
Waseem Siddharthnagari
तरकीब ढूँढता हूँ उन्हें भूल जाने की
और इस अमल में याद वो फिर और आते हैं
Waseem Siddharthnagari

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