चेहरे से ख़ुश-मिज़ाज अदाकारी ख़ास हैवो शख़्स ग़म में मुब्तिला है या'नी ख़ास हैवो जब तपाक से गले मुझ को लगाएगीमालूम होगा तब उसे वो कितनी ख़ास है— Waseem Siddharthnagari