हम को पहले जैसी अब तो ज़िंदगी मिलती नहीं
तीरगी से क़ब्ल हम को रौशनी मिलती नहीं
आप की क्या अहमियत है आप को मालूम है
आप के बिन एक पल की भी ख़ुशी मिलती नहीं
हिज्र के अय्याम में करते हैं जो मरने की बात
ज़िंदगी भर उन को सच में आशिक़ी मिलती नहीं
हम मोहब्बत करने वालों पर सितम कुछ कम नहीं
सच्चे दिल से चाहने वाली कभी मिलती नहीं
ख़ुद-कुशी से मरने वाले हैं बड़े बुज़दिल 'वसीम'
सच है ये भी बुज़दिलों को ज़िंदगी मिलती नहीं
— Waseem Siddharthnagari















