हमारा ज़िक्र अक्सर कर रही है
ये लड़की प्यार में पगला गई है
ग़लत सब फ़ैसले करने लगा है
उसे भी क्या मोहब्बत हो गई है
झुका लेना निगाहें अपनी अपनी
वो लड़की हम से पर्दा कर रही है
ख़ुदा के फ़ैसलों पे सब्र कर लो
बहुत आसान फिर ये ज़िंदगी है
तुम्हें दस्तक तो देनी चाहिए थी
वो दस्तक पर ही कुंडी खोलती है
— Waseem Siddharthnagari















