सारी दुनिया उस की ख़्वाहिश
उस को पाना मेरी ख़्वाहिश
उस की ख़्वाहिश मैं क्या जानूँ
वो है मेरी पहली ख़्वाहिश
अहल-ए-हवस का आलम देखो
जो मिल जाए वो ही ख़्वाहिश
सारी ख़्वाहिश से बढ़कर है
दिल में हुब्ब-ए-नबी की ख़्वाहिश
रब हो जाए मुझ से राज़ी
मेरी बस है इतनी ख़्वाहिश
— Waseem Siddharthnagari















