"आफ़्टरग्लो"
वो
खिड़की के पास खड़ी थी
बारिश अपने हाथों से
उस के गालों को सहलाती थी
उस ने भीगी ज़ुल्फ़ों को शाने पर डाला
कमरा महका
धुंध सी छाई
और फिर यक-दम
सूरज ने आ कर पलकों पर ज़र्दी फेंकी
मैंने देखा
ख़ाली कमरा
और खिड़की में लगा हुआ इक भीगा पर्दा
— ZARKHEZ















