उम्मीद ए विसाल ए जांँ मिसमार हुई नहींये दामन-ए-शब अभी दुश्वार हुई नहींउस ने भी शब-ए-गुज़श्ता क़ैद रखी हवसहम से भी बदन की सरहद पार हुई नहीं— Sabir Hussain