मैंने दिल चीर कर रख लिया
क़दमों में उसके सर रख लिया
घर था वीरान उसके बगै़र
सो उदासी को घर रख लिया
जब भी तरसा हूँँ मैं नींद को
गोद में मांँ की सर रख लिया
वो शजर था किसी और का
जिसका तुमने समर रख लिया
जेब भर कर कलाकार की
कंपनी ने हुनर रख लिया
कुछ भी अपना नहीं था 'अभय'
अपना जो मान कर रख लिया
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