ye qarz to meraa hai chukaayega koi aur | ये क़र्ज़ तो मेरा है चुकाएगा कोई और

  - Aanis Moin

ये क़र्ज़ तो मेरा है चुकाएगा कोई और
दुख मुझ को है और नीर बहाएगा कोई और

क्या फिर यूँँही दी जाएगी उजरत पे गवाही
क्या तेरी सज़ा अब के भी पाएगा कोई और

अंजाम को पहुँचूँगा मैं अंजाम से पहले
ख़ुद मेरी कहानी भी सुनाएगा कोई और

तब होगी ख़बर कितनी है रफ़्तार-ए-तग़य्युर
जब शाम ढले लौट के आएगा कोई और

उम्मीद-ए-सहर भी तो विरासत में है शामिल
शायद कि दिया अब के जलाएगा कोई और

कब बार-ए-तबस्सुम मिरे होंटों से उठेगा
ये बोझ भी लगता है उठाएगा कोई और

इस बार हूँ दुश्मन की रसाई से बहुत दूर
इस बार मगर ज़ख़्म लगाएगा कोई और

शामिल पस-ए-पर्दा भी हैं इस खेल में कुछ लोग
बोलेगा कोई होंट हिलाएगा कोई और

  - Aanis Moin

Gunaah Shayari

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