ज़माने में निखरना चाहता हूँ

कुछ ऐसा काम करना चाहता हूँ

ये जो बेरंग-सी दुनिया है अपनी
मैं इस
में रंग भरना चाहता हूँ

तुम्हारी तरह हर वादे से अपने
कभी मैं भी मुकरना चाहता हूँ

मुझे मजबूरियाँ रोके हैं वरना
किसी से प्यार करना चाहता हूँ

जिया तन्हा हूँ सारी उम्र लेकिन
तुम्हारे साथ मरना चाहता हूँ

और इस
में रह के क्या पाया है आवेस
सो अब हद से गुज़रना चाहता हूँ

— Adv Aaves Shaikh

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