
वतन की मिट्टी का मोल क्या है जो बिक चुके हैं उन्हें पता क्या
वतन परस्ती का उन से पूछो है जिन का अब तक ज़मीर ज़िंदा
मिली है गर सर पे सर कटे हैं न काम आई कोई सियासत
अतीत में देखो रंग जा कर है ज़ा'फ़रानी स्वतंत्रता का
— Ajeetendra Aazi Tamaam
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