"तू वही लड़की है मैं भी वही लड़का हूँ"

क्या याद है गोरी बचपन में
दिल तू ने रखा था अचकन में
दिल तुझ से मैं ने माँगा था
फिर ठेंगा तू ने दिखाया था
तू सच में वो ही लड़की है
मैं सच में वो ही लड़का हूँ
तू मुझ से मोहब्बत करती है
मैं तुझ से मोहब्बत करता हूँ

दिल धड़कन एक मिनट में सब
आपस में जितनी बार मिले
हम दोनों भी इक दूजे से
इक दिन में उतनी बार मिले
जब मुझ से ग़लती होती थी
तू पागल कह के चिढ़ाती थी
पीछे से दुबारा आती थी
तू छेड़ के मुझ को जाती थी
पर जब लगती थी चोट मुझे
तू दूर से रोने लगती थी
जल्दी से भाग के आती थी
सीने से मुझ को लगाती थी
कहती थी सॉरी कान पकड़
तू दारू दवा सब करती थी
तू साथ में मेरे खेली है
मैं साथ में तेरे खेला हूँ
तू लड़की हाई-फाई है
और मैं लड़का अलबेला हूँ
तू सच में वो ही लड़की है
मैं सच में वो ही लड़का हूँ
तू मुझ से मोहब्बत करती है
मैं तुझ से मोहब्बत करता हूँ

मैं रोज़ तिरे घर आता था
तू रोज़ मिरे घर आती थी
स्कूल को दोनों जाते थे
तू मुझ को रोज़ बुलाती थी
तू मुझ को घर पे पढ़ाती थी
और हाथों से लिखवाती थी
कितनी शैतानी करता था
तू कान पकड़ के रखती थी
मैं आँख से ओझल होता था
फिर तू भी डरने लगती थी
तू मुझ को ढूँढती थी सब में
तू मुझ को देखती थी सब में
तू जान बताती थी मुझ को
हाथों से खिलाती थी मुझ को
मैं शाम सवेरे जान-ए-मन
तेरी गोदी में सोया हूँ
तू सच में वो ही लड़की है
मैं सच में वो ही लड़का हूँ
तू मुझ से मोहब्बत करती है
मैं तुझ से मोहब्बत करता हूँ

— Prashant Kumar

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