बहुत प्यारी लगी मुझको इलाहाबाद की लड़की
मुझे हिचकी लगी आने कि जैसे याद की लड़की
परेशाँ थी ज़रा सी बात पर इक यार की ख़ातिर
उसे अव्वल बनाई और मुझको बाद की लड़की
उसे ये यार कहती थी जिसे इनसे मोहब्बत थी
उसे समझाऊँ मैं कैसे यही फ़रियाद की लड़की
बड़ी मुश्किल हुई उसको मगर उसने ये कर डाला
किसी की बन न पाई ज़िंदगी बर्बाद की लड़की
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