कुछ नया इंतिज़ाम करते हैं
'इश्क़ सा नेक काम करते हैं
जानकर दुख हुआ मोहब्बत में
लोग ऐसे भी काम करते हैं
तेरी आदत मुझे लगी ऐसी
ख़ुद को सारा तमाम करते हैं
हुस्न ज़ालिम, अदा अज़िय्यत है
सारे झुक कर सलाम करते हैं
तीरगी ख़त्म हो गई दिल की
शे'र का इख़्तिताम करते हैं
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