hain lab lateef uske qath gulaab ki tarah | हैं लब लतीफ़ उसके क़ठ गुलाब की तरह

  - Faiz Ahmad

हैं लब लतीफ़ उसके क़ठ गुलाब की तरह
चमकता उसका रुख़ है माहताब की तरह

ये लग रही है तुमको जो शराब की तरह
पर उतरे है गले से ये भी आब की तरह

बस इक दो पन्ने पढ़के जान सकती है मुझे
मुझे समझ रही है वो किताब की तरह

निका़ह के दिन उसके आ रहें क़रीब अब
ये नेमतें उतर रही अज़ाब की तरह

उतारना है सदक़ा गुज़रे साथ वक़्तों का
मैं लिख रहा हूँ वस्ल को हिसाब की तरह

जहान भर में हो रहा है रुसवा 'अहमद' अब
वो पर इसे भी लेता है ख़िताब की तरह

  - Faiz Ahmad

Hug Shayari

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