le gayi udaakar jo kuchh laga ziyaada hai | ले गई उड़ाकर जो कुछ लगा ज़ियादा है

  - Akshay Sopori

ले गई उड़ाकर जो कुछ लगा ज़ियादा है
आज कल हवाओं का हौसला ज़ियादा है

मेरे बारे में कहता फिरता है यही सब सेे
लड़का ठीक है लेकिन चूमता ज़ियादा है

शब चराग़ मैंने ख़ुद हाथ से बुझाया था
और कह दिया था तुम सेे हवा ज़ियादा है

'इश्क़ करके इतना तो जान ही गया हूँ मैं
'इश्क़ बोलता कम है, सोचता ज़ियादा है

कुछ दिनों से ऐसी बाँहों में रात होती है
गर बता दूँ, बोलोगे फेंकता ज़ियादा है

  - Akshay Sopori

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