Akshay Sopori

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@akshaysopori

Akshay Sopori shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Akshay Sopori's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मैं ने फूलों को भी चूम कर देखा है उन लबों सा कहीं ज़ाइक़ा ही नहीं — Akshay Sopori
हुई थी लाख कोशिश बच निकलने की कभी निकले नहीं दिल से नहीं निकले — Akshay Sopori
दिल लगाने से ये दिल डरता नहीं है मेरा दिल इस बात से डरता बहुत है — Akshay Sopori
एक हम जो कुछ न पाकर मुतमइन रहने लगे और हम उन के रहे इस बात का ग़म है उन्हें — Akshay Sopori
तिरे बच्चे है बेअदब कितने मौला तिरे बच्चों से ही नसब पूछते है — Akshay Sopori
तजस्सुस है कि उन दो आँखोंँ में ऐसा रखा क्या है शनावर अच्छे अच्छे डूब के जिन में आ जाते हैं — Akshay Sopori
मेरे बारे में कहता फिरता है यही सब सेे लड़का ठीक है लेकिन चूमता ज़्यादा है — Akshay Sopori
तुम जो पत्थर दिल हो पत्थर फेंकते जाओ न हम पर हम जो दिल-जू हैं तुम्हारे दिल को रखना चाहते हैं — Akshay Sopori
बात क्या करोगी अब बैठ कर अकेले में मस'अले तो सारे लिख कर बता चुका हूँ मैं — Akshay Sopori
मुनासिब नहीं होगी जन्नत भी यारों सुना है वहाँ सब से सब पूछते है — Akshay Sopori

Ghazal

रहे इश्क़ नाकिस तो सब पूछते है अहल-ए-जहाँ वरना कब पूछते है तसव्वुर में आते है नक़्क़ाद मेरे बिछड़ने का मुझ सेे सबब पूछते है समुंदर मिटाते नहीं प्यास सबकी हो प्यासा तो पहले तलब पूछते है कईं बातें पहले शर्म की वजह से नहीं पूछ पाते थे अब पूछते है जवाबात कैसे ना आँखों में आते सवालात यूँँ लब से लब पूछते है बे-पर्दा रहो आँखों पे हाथ रखदो सितमगर हुस्न-ए-तलब पूछते है अभी भी है शीरीन क्या लब तुम्हारे अजी मैं नहीं मेरे लब पूछते है तिरे बच्चे है बेअदब कितने मौला तिरे बच्चों से ही नसब पूछते है मुनासिब नहीं होगी जन्नत भी यारों सुना है वहाँ सब से सब पूछते है — Akshay Sopori

Nazm

"करे कोई" हाल की ना दुआ करे कोई ऐसा भी क्या किया करे कोई शम-ए-उम्मीद बुझ गई हो फिर जितनी चाहे हवा करे कोई अब तबी'अत का है तकाज़ा ये राब्ता या तो तोड़ दें मुझ सेे दिल-लगी हो जो छोड़ दें मुझ सेे या मुझी को ख़ुदा करे कोई जितना चाहे मना करे कोई एक लड़की है गाल पे तिल दो नाम उस का पता करे कोई सूट का रंग है हरा उस के सो मुझे भी हरा करे कोई हाए उस के वो अंबरी गेसू हाए उस के वो सुम्बलीं गेसू हाए उस के वो गेसू-ए-पुर-ख़म देख कर सोचता हूँ मैं इन से कैसे खुदको रिहा करे कोई बात थोड़ी अजीब तो है पर ये अभी से मुझे नहीं मंज़ूर नाफ़-प्याला छुआ करे कोई जितनी चाहे पिया करे कोई जितनी चाहे पिया करे कोई जितना चाहे नशा करे कोई — Akshay Sopori
"मोहब्बत" पहले पहले उल्फ़त होगी रफ्ता-रफ्ता नफ़रत होगी चुटकी जितना इश्क़ बचेगा बाकी यार ज़रूरत होगी थोड़े दिन की हाजत होगी थोड़े दिन की क़िल्लत होगी इश्क़ मोहब्बत इन चीज़ों की इतनी सी तो उजरत होगी दुनिया तेरे पीछे होगी जाने किस की दौलत होगी बाकी सब भूलेंगे कैसे सब को ही तो आदत होगी तुझ को जिन से चाहत होगी उन की शान-ओ-शौकत होगी तुझ सेे सारे गुल जलते है या'नी प्यारी निकहत होगी जिन के हाथो में तू होगी कितनी अच्छी किस्मत होगी नीचे तेरी बाहें है दो ऊपर कैसी जन्नत होगी? हर्फ़ों से इक शब्द बनेगा शब्दों में इक सूरत होगी पढ़ने पर सब पोशीदा है देखोगे तो हैरत होगी सोचोगी जो सीरत मेरी खुदपर तुम को लानत होगी मेरे ख़त औ मेरी नज़्मों को पढ़कर अच्छी हालत होगी — Akshay Sopori