vo sadaa jo ki kaan men aayi | वो सदा जो कि कान में आई

  - Akshay Sopori

वो सदा जो कि कान में आई
पहले दिल के मकान में आई

टूटे होंगे ज़रूर कुछ के दिल
अक्ल तो ही जहान में आई

आख़िरी रात शहर में उसकी
बस अचानक गुमान में आई

लब चबाए थे किसने झगड़े में
नर्मी कैसे ज़बान में आई

चाहता था गुलाब दूँ उसको
दोस्ती दरमियान में आई

जान-ए-जाँ भूलने की ठानी थी
जान-ए-जाँ और ध्यान में आई

मैं जिसे सोचता हुआ सोया
रात को आसमान में आई

पूछ क्यूँ देखता हूँ पढ़ता हूँ
तू अगर इम्तिहान में आई

  - Akshay Sopori

Good night Shayari

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