लोग जो हँसते-मुस्कुराते हैं

बस तुम्हारे ही गीत गाते हैं

तुम ख़ुदा से उदास होती हो
बाग़ में फूल सूख जाते हैं

मछली पानी में डूब जाती हैं
पेड़ों से पंछी कूद जाते हैं

ये नज़र ये तुम्हीं पे रहती है
साठ आते हैं, साठ जाते हैं

सोचने पे ग़ज़ल निकलती है
देख कर शे'र फूट जाते हैं

सोचो बे-पर्दा सोचने भर से
आँखों में पर्दे छूट जाते हैं

बा'द नब्बे के, इश्क़ में देखो
तीन ज़हरीले साँप आते हैं

— Akshay Sopori

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