"करे कोई"

हाल की ना दुआ करे कोई
ऐसा भी क्या किया करे कोई

शम-ए-उम्मीद बुझ गई हो फिर
जितनी चाहे हवा करे कोई

अब तबी'अत का है तकाज़ा ये
राब्ता या तो तोड़ दें मुझ से
दिल-लगी हो जो छोड़ दें मुझ से
या मुझी को ख़ुदा करे कोई
जितना चाहे मना करे कोई

एक लड़की है गाल पे तिल दो
नाम उस का पता करे कोई
सूट का रंग है हरा उस के
सो मुझे भी हरा करे कोई

हाए उस के वो अंबरी गेसू
हाए उस के वो सुम्बलीं गेसू
हाए उस के वो गेसू-ए-पुर-ख़म
देख कर सोचता हूँ मैं इन से
कैसे खुदको रिहा करे कोई

बात थोड़ी अजीब तो है पर
ये अभी से मुझे नहीं मंज़ूर
नाफ़-प्याला छुआ करे कोई
जितनी चाहे पिया करे कोई

जितनी चाहे पिया करे कोई
जितना चाहे नशा करे कोई

— Akshay Sopori

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