"मोहब्बत"

पहले पहले उल्फ़त होगी
रफ्ता-रफ्ता नफ़रत होगी
चुटकी जितना इश्क़ बचेगा
बाकी यार ज़रूरत होगी

थोड़े दिन की हाजत होगी
थोड़े दिन की क़िल्लत होगी
इश्क़ मोहब्बत इन चीज़ों की
इतनी सी तो उजरत होगी

दुनिया तेरे पीछे होगी
जाने किस की दौलत होगी
बाकी सब भूलेंगे कैसे
सब को ही तो आदत होगी

तुझ को जिन से चाहत होगी
उन की शान-ओ-शौकत होगी
तुझ से सारे गुल जलते है
या'नी प्यारी निकहत होगी

जिन के हाथो में तू होगी
कितनी अच्छी किस्मत होगी
नीचे तेरी बाहें है दो
ऊपर कैसी जन्नत होगी?

हर्फ़ों से इक शब्द बनेगा
शब्दों में इक सूरत होगी
पढ़ने पर सब पोशीदा है
देखोगे तो हैरत होगी

सोचोगी जो सीरत मेरी
खुदपर तुम को लानत होगी
मेरे ख़त औ मेरी नज़्मों को
पढ़कर अच्छी हालत होगी

— Akshay Sopori

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