"मैं ने सोचा था"

मैं ने सोचा था मोहब्बत से गुज़र जाएगी
ज़िंदगी यूँ तिरी चाहत से गुज़र जाएगी
उम्र गुज़रेगी तिरे साथ में चलते चलते
इस तरह आग हिफ़ाज़त से गुज़र जाएगी

तेरे होने से दरख़्तों पे पलट आती बहार
तू नहीं थी तो परिंदों को बसेरा क्या था
तेरी दुनिया तो फ़क़त थी मिरी दुनिया से अलग
तू नहीं थी तो फिर इस दहर में मेरा क्या था

मैं ने सोचा था कि हर चीज़ यूँ ही चलती रहे
जब भी निकले तो तेरे साथ मेरा दम निकले
तेरे हिस्से में ख़ुशी निकली वो भी मुट्ठी भर
मेरे हिस्से में तो बस यार फ़क़त ग़म निकले

ये भी सच है कि ये दुनिया है मिरी जान यहाँ
वक़्त आता है तो हर चीज़ पलट जाती है
तू मेरी जान किसी बात का अफ़सोस न कर
मेरी हर बात तिरी बात से कट जाती है

ये जो गहरी सी उदासी है मेरी आँखों में
तेरा ग़म मुझ
में कहीं दूर छुपा बैठा है
हाँ किसी बात का अफ़सोस नहीं है लेकिन
था कोई मुझ
में जो दहलीज़ पे आ बैठा है

इतनी तन्हा है मोहब्बत की डगर चलते हैं
वैसे चलना था तेरे साथ मगर चलते हैं

— Ankit Yadav

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