chhukar dar-e-shifa ko shifa ho gaya hoon main | छूकर दर-ए-शिफा को शिफा हो गया हूँ मैं

  - Ali Zaryoun

छूकर दर-ए-शिफा को शिफा हो गया हूँ मैं
इस अरसा-ए-वबा में दुआ हो गया हूँ मैं

इक बे-निशा के घर का पता हो गया हूँ मैं
हर ला दवा के ग़म की दवा हो गया हूँ मैं

मैं था जो अपनी आप रुकावट था साहिबा
अच्छा हुआ कि ख़ुद से जुदा हो गया हूँ मैं

तूने उधर जुदाई का सोचा ही था इधर
बैठे-बिठाए तुझ से रिहा हो गया हूँ मैं

तुमको ख़बर नहीं है कि क्या बन गए हो तुम
मुझ को तो सब पता है कि क्या हो गया हूँ मैं

मैं हूँ तो लोग क्यूँँं मुझे कहते हैं कि वो हो तुम
गर तुम नहीं तो किस में फना हो गया हूँ मैं

  - Ali Zaryoun

Udasi Shayari

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