सादगी में हसीन दिखता थाचाँद से बेहतरीन दिखता थादाग़ तो चाँद में भी थे लेकिनदूर से वो हसीन दिखता थासब की नज़रों में जो था मामूलीवो मुझे मह-जबीन दिखता थाधूप हो छाँव हो या बादल होपर वो ताज़ा-तरीन दिखता था— Alok Kumar 'Tabiib'