nibhaane puraani rifaqat ki khaatir | निभाने पुरानी रिफ़ाक़त की ख़ातिर

  - Ambar

निभाने पुरानी रिफ़ाक़त की ख़ातिर
वो आए हैं मिलने अयादत की ख़ातिर

रहो मिलते जुलते यूँँ मुख तो न मोड़ो
नहीं दोस्ती तो अदावत की ख़ातिर

तुम आए हो दुनिया में क्यूँँ? मैं बताऊँ?
मेरे दिल पे करने हुकूमत की ख़ातिर

बड़ा ही अहम है बुज़ुर्गों का होना
रहें वो सलामत रिवायत की ख़ातिर

यूँँ बैठे से 'अंबर' न होवे गुज़ारा
भटकता बशर है तिजारत की ख़ातिर

  - Ambar

Aadmi Shayari

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