मरने का बस आदी है
प्यार फ़क़त बर्बादी है
उस ने ख़त में लिक्खा है
कल को मेरी शादी है
कितनी भी कोशिश कर लूँ
मिलती नहीं आज़ादी है
दिल तो बस मेरा टूटा
गुम-सुम क्यूँ ये वादी है
सामने सबके रो न सकूँ
कैसी मुझ को सज़ा दी है
अंबर अपनी क़िस्मत में
तू ने लिखी बर्बादी है
— Ambar















