दिल ही तो टूटा है बस कोहराम कैसाधड़कनों से ख़ुद की ही इग़्राम कैसाजब दुआ मंज़ूर दोनों की हुई थीफिर ख़ुदा पर हिज्र का इल्ज़ाम कैसा— Rehaan