न सोचा था तिरा ग़म यूँँ हमें मजबूर कर देगा
ये अपने आप से इक रोज़ हमको दूर कर देगा
मुहब्बत में ज़रूरी है सनम को चाहना लेकिन
तुम्हारा चाहना इतना उसे मग़रूर कर देगा
तुम्हें खोने का दुख है जो मुसलसल गा रहे हैं हम
सनम तुम देखना ये ग़म हमें मशहूर कर देगा
नहीं हम चाहते लेना ग़लत अब फ़ैसला कोई
मगर ये हिज्र तेरा जान-ए-जाँ मजबूर कर देगा
उदासी राहतें तो देती है कुछ देर को लेकिन
ये वो मरहम है जो इस ज़ख़्म को नासूर कर देगा
Read Full