इस सेे बेहतर तो कुछ इस दुनिया में देखा ही नहीं
तेरे चेहरे-सा यहाँ कोई भी चेहरा ही नहीं
मैं ने आवाज़ें उसे दीं थी न जाने कितनी
मेरी ख़ातिर वो मगर राह में ठहरा ही नहीं
हमने छानी है बहुत ख़ाक जहाँ भर की मगर
हमको तुम जैसा यहाँ कोई भी मिलता ही नहीं
हमने चाहा तो यही था कि वो मिल जाए हमें
इस हथेली में मगर यार वो रेखा ही नहीं
हमने देखे हैं नदी झील समुंदर कितने
तेरी आँखों-सा मगर कुछ भी तो गहरा ही नहीं
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