हैरत में आ गया हूँ मैं हैरत में देख करख़ुश हो रहे हो तुम जिसे वहशत में देख करऐसा न हो कि उस की तुम्हें बद-दुआ लगेख़ुश हो रहे हो तुम जिसे ग़ुर्बत में देख करजब क़ैद था परिंदा नदामत नहीं हुईहैरान क्यूँ हो अब उसे वुस'अत में देख कर— Ansar Eatvi