इश्क़ का ज़ख़्म ताज़ा हरा कर लिया
एक इल्ज़ाम था हम ने जो सर लिया
हम ने सोचा नहीं इश्क़ में फिर नफ़ा
राह में जो मिला बाँह में भर लिया
आप पिघले नहीं देख कर अश्क ये
एक पत्थर को हम ने सनम कर लिया
— anupam shah
एक इल्ज़ाम था हम ने जो सर लिया
हम ने सोचा नहीं इश्क़ में फिर नफ़ा
राह में जो मिला बाँह में भर लिया
आप पिघले नहीं देख कर अश्क ये
एक पत्थर को हम ने सनम कर लिया
Other ghazal from the same pen
Shers of ulfat shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling