मुहब्बत में निगाहों को ज़बाँ कैसे किया जाए
जो तुम में है निहाँ उस को ‘अयाँ कैसे किया जाए
कई बातें हैं दिल में तुम से कहने को मगर कैसे
जो अब तक कह नहीं पाए बयाँ कैसे किया जाए
मुसलसल ज़िंदगी में और भी कुछ दर्द हैं ऐसे
तुम्हीं को एक अपना सब जहाँ कैसे किया जाए
— anupam shah















