तन्हा जीते जी मर जाना पड़ता है
ऐसे ही क्या प्यार निभाना पड़ता है
जिसके बिना नहीं ये दिल मेरा लगता
उसके घर तो आना जाना पड़ता है
मयखाने से पीकर हम घर को निकले
रस्ते में भी इक मयखाना पड़ता है
कह देना कि 'इश्क़ है आसां काम नहीं
कहने में थोड़ा हकलाना पड़ता है
जब आँखों से राज कोई पढ़ लेता है
अपने ही सच को झुठलाना पड़ता है
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