मुहब्बत को निभा देता तमाशाई मेरे जैसा

कभी तू ने किया होता यूँ वा'दा ही मेरे जैसा

मुझे भी राह में चलते हुए मिल जाएगी मंज़िल
तुम्हें भी फिर कहीं मिल जाएगा कोई मेरे जैसा

मुझे हर हाथ ने कुछ इस तरह से अब तराशा है
न मुझ
में रह गया हूँ मैं कहीं बाक़ी मेरे जैसा

— anupam shah

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