आज कुछ तो ठानी हैबात उस ने मानी हैथाम लेता मैं उस कोये उसे बतानी हैदिल मेरा नहीं टूटाबात ये भुलानी हैहौले से उसे छू केप्यास इक बुझानी हैकोहसार लब चुप हैंख़ामोशी सुनानी है— anujlakhnavi