इश्क़ कर के गुनाह कर बैठे

आज ख़ुद को तबाह कर बैठे

मैं तो दिल का सुना रहा था हाल
आप तो वाह वाह कर बैठे

आ रहा था मज़ा सफ़र का फिर
यूँ हुआ ख़त्म राह कर बैठे

— Arbab Shaz

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