जब भी आता है ये ज़िक्र कैसे भी जन्नत कामेरी बाहों में तेरा सिमटना याद आता हैलफ़्ज़ ता'रीफ़ के तेरे सुनते ही शर्मानातेरे गालों का वो सुर्ख़ होना याद आता है— arjun chamoli